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जींद के किसानों को 2 रुपए प्रति पौधा अनुदान देेने का निर्णय लिया

 
 
June 12, 2012

हरियाणा में गन्ने का रकबा बढ़ाने तथा किसानों के लिए गन्ने की फसल को लाभप्रद बनाने के दृष्टिगत सहकारी चीनी मिल जींद ने टीशू कल्चर विधि से तैयार गन्ने की नई व उन्नत किस्म के बीजों पर जिला जींद के किसानों को 2 रुपए प्रति पौधा अनुदान देेने का निर्णय लिया है।   एक सरकारी प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष जिला जींद में गन्ने की पैदावार में काफी बढ़ौतरी हुई है और इस क्षेत्र में गन्ने की फसल की अधिक बुआई करवाने के दृष्टिगत चीनी मिल द्वारा किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए है। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल में किसी प्रकार की कोई बीमारी का प्रकोप न हो, इसके लिए भूमि उपचार तथा कीटो की रोकथाम के लिए दवाईयां 10 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके अलावा किसानों को उन्नत किस्म के गन्ने के बीज उपलब्ध करवाने के लिए मिल द्वारा पौद तैयार करवाई जाती है। यह पौद गर्म हवा चलित मशीनों द्वारा उच्च तकनीक से तैयार करवाई जाती है। उन्होंने बताया कि नवीनतम विधि से उन्नत किस्म के तैयार किए गए पौधों की बिजाई करवाने के लिए किसानों को मिल द्वारा मशीनों की सुविधा भी मुफत प्रदान की जा रही है। उन्हांेने बताया कि मिल परिसर में एक जैविक प्रयोगशाला का भी निर्माण करवाया गया है। इस प्रयोगशाला पर राज्य सरकार द्वारा 63 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है। यह प्रयोगशाला किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है। इस प्रयोगशाला में किसानांे को गन्ने की फसल में आने  वाले तना भेद्यक तथा पायरिया आदि रोगों की रोकथाम में प्रयुक्त होने वाले परजीवों को तैयार कर 100 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाया जाता है। उन्हांेने बताया कि मिल द्वारा जिला में गन्ना उत्पादक किसानों को प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रूपए की राशि खर्च कर यह सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। टीशू कल्चर विधि द्वारा तैयार किए गए उन्नत किस्म के बीज पर दो रूपए प्रति पौध के हिसाब से 70 हजार रूपए का अनुदान किसानों को उपलब्ध करवा दिया गया है। उन्होंने बताया कि किसानों को अगेती व मध्यम किस्म के गन्ने का बीज भी ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस योजना के अनुसार गन्ने की बिजाई करने के लिए किसानों से आर्थिक बोझ काफी कम हो गया है। पिछले वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिला जींद में 172 लाख रूपए से भी अधिक की राशि किसानों को ब्याज मुक्त ऋण के रूप में उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने बताया कि किसानों को पहले गन्ना क्रय केन्द्रों पर किसानों द्वारा खुद लाया जाता था और इसकी ढुलाई व लदाई का खर्च भी स्वयं ही वहन करना पड़ता था । लेकिन राज्य सरकार ने वर्ष 2009 से ढुलाई के खर्च पर भी 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है। जींद चीनी मिल द्वारा किसानों को यह सुविधा उपलब्ध करवाने पर लगभग 45 हजार रूपए की राशि अनुदान के रूप में दी जा चुकी है। 

 
 


 

 

 

 

 

 

 

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