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किसान राजबीर कटारिया ने इजराइली तकनीक से प्रदेश का पहला फरंट लाइन डैमोस्ट्रेशन सैंटर तैयार किया

 
 
May 9, 2012

हरियाणा बागवानी विभाग द्वारा परम्परागत फसलों के स्थान पर किसानों का रूझान अन्य नकदी फसलों की ओर बढ़ाने के लिए चलाये जा रहे अपने अभियान के तहत जींद जिले के सिंधवी खेड़ा के प्रगतिशील किसान राजबीर कटारिया ने इजराइली तकनीक से प्रदेश का पहला प्रदर्शन केन्द्र (फरंट लाइन डैमोस्ट्रेशन सैंटर) तैयार किया है तथा इसमें बागवानी की पहली फसल खीरा पककर तैयार भी हो गई है। एक सरकारी प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि केन्द्र एक एकड़ क्षेत्र में है तथा इस पर 25 लाख रूपए की लागत आई है। इस केन्द्र को देखने के लिए प्रदेश भर से प्रतिदिन 60 से 70 किसान पहुंच रहे है।  सैंटर के भ्रमण के उपरांत किसानों का बागवानी एवं पोलीहाऊस तकनीकी की तरफ काफी रूझान बढ़ रहा है और वे राज्य सरकार की बागवानी क्षेत्र के विकास में किए गए इन प्रयासों की बड़ी प्रशंसा कर इस तकनीकी को अपनाने पर बल दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि पोली हाऊस स्थापित करने वाले किसानों को राज्य सरकार द्वारा 65 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है। प्रगतिशील किसान राजबीर कटारिया ने बताया कि डैमोस्ट्रेशन सैंटर फिलहाल 1650 मीटर क्षेत्र में विकसित किया गया है और इसमें प्रथम फसल के रूप में खीरे की खेती प्रयोग के तौर पर शुरू की गई है। उनका मानना है कि परम्परागत खेती की अपेक्षा यह तकनीक कई गुणा अधिक किसानों को फायदा पहुचां सकती है और छोटे किसानों के लिए यह तकनीकी वरदान साबित होगी। उन्होेंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से एक वर्ष मंे 3 फसल लगाकर इसका लाभ प्राप्त किया जा सकता है। फिलहाल ट्रायल बेस पर की गई खीरे की खेती से 150 से 200 क्विंटल खीरे का उत्पादन होने की उम्मीद है। अगर सही समय पर पूरी सावधानी के साथ बागवानी की कृषि इस तकनीक से की जाए तो उत्पादन में और बढ़ौतरी की जा सकती है। सब्जियों  की गुणवत्ता को देखते हुए मार्केटिंग की भी कोई समस्या आडे़ नहीं  आती है। सब्जियांें की गुणवत्ता को देखते हुए ग्राहक डैमोस्ट्रेशन सैंटर पर ही पहुंचकर सब्जियां खरीद रहे है और अग्रिम खरीद के भी आर्डर मिल रहे है।  उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में हाईटैक सिस्टम के माध्यम से एक लाख सब्जी के प्यौध तैयार करके जींद जिला के किसानों को उपलब्ध करवाई जाएगी। प्यौद की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि विदेशी तकनीकी से तैयार इन सब्जियों के प्रति पौधे से 5 से 6 किलो खीरे की सब्जी का उत्पादन लिया जा सकता है। इस तकनीक की खास बात यह हे कि पौधौ को तैयार करने एवं उत्पादन में बढौतरी करने के लिए परम्परागत खेती की तरह खाद एवं दवाईयों का प्रयोग नहीं किया जाता। बल्कि इसमें खेत में ही तैयार केंचुए की खाद डालकर पर्याप्त उत्पादन लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि डैमोस्ट्रेशन को विकसित करने के लिए राज्य सरकार की और से हर संभव मदद उपलब्ध करवाई जा रही है। इस वर्ष राज्य सरकार के बागवानी विभाग के माध्यम से बीज उपलब्ध करवाए गए जिससे यह फसल पककर तैयार हो चुकी है। उन्हांेने बताया कि फसल की देखरेख के लिए फसल विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर डैमोस्ट्रेशन की यात्रा की जा रही है और उचित सलाह भी उन्हे उपलब्ध करवाई जा रही है।  

 
 


 

 

 

 

 

 

 

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